अगस्त 2026 का महीना पश्चिम बंगाल और विशेष रूप से कोलकाता के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सावन और भाद्रपद के पावन महीनों में अनेक प्रमुख हिंदू पर्व मनाए जाते हैं, जो परिवार में सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मंगलमय जीवन की कामना के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
चातुर्मास के दौरान आने वाले इन पर्वों में शास्त्रानुसार पूजा-विधि का पालन करना शुभ माना जाता है। यदि पूजा सही विधि से संपन्न की जाए तो परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, समृद्धि तथा मानसिक शांति का संचार होता है। आइए जानते हैं अगस्त 2026 के प्रमुख हिंदू त्योहारों के बारे में।
अगस्त 2026 के प्रमुख त्योहार
• कजरी तीज — 1 अगस्त 2026 (शनिवार)
कजरी तीज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती को समर्पित होता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य के लिए तथा अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन नीम के वृक्ष अथवा माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
• रक्षा बंधन — 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षा बंधन भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। श्रावण मास की पूर्णिमा होने के कारण भगवान शिव एवं भगवान विष्णु की विशेष पूजा और हवन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
• श्रीकृष्ण जन्माष्टमी — 29 अगस्त 2026 (शनिवार)
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मध्यरात्रि में बाल गोपाल का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद एवं गंगाजल से किया जाता है। भगवान को छप्पन भोग एवं तुलसी दल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है।
अगस्त 2026 पर्व कैलेंडर
| त्योहार | तिथि | मुख्य पूजा |
|---|---|---|
| कजरी तीज | 1 अगस्त 2026 | माता पार्वती की पूजा एवं अखंड सौभाग्य की कामना |
| रक्षा बंधन | 28 अगस्त 2026 | रक्षा सूत्र, शिव-पूजन एवं पारिवारिक मंगलकामना |
| श्रीकृष्ण जन्माष्टमी | 29 अगस्त 2026 | मध्यरात्रि श्रीकृष्ण अभिषेक एवं छप्पन भोग |
*चातुर्मास के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु इस अवधि में प्याज, लहसुन, मांसाहार तथा अन्य तामसिक भोजन से परहेज़ करते हैं। अपने परिवार की परंपरा एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करें।*
योग्य पंडित के मार्गदर्शन का महत्व
जन्माष्टमी, कजरी तीज और रक्षा बंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्वों पर शुभ मुहूर्त, सही पूजा-विधि तथा वैदिक मंत्रों का उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अनुभवी एवं विद्वान पंडित के मार्गदर्शन में पूजा कराने से धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न होते हैं और परिवार को आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है।
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