कजरी तीज 2026: महत्व

1 अगस्त 2026 (शनिवार) को पूरे भारत सहित कोलकाता में विवाहित एवं अविवाहित महिलाएँ श्रद्धा के साथ कजरी तीज (बड़ी तीज या सातुड़ी तीज) का व्रत रखेंगी। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और भगवान शिव तथा माता पार्वती की आराधना को समर्पित है।

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तप की स्मृति में यह व्रत किया जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

कजरी तीज व्रत के प्रमुख लाभ


• दाम्पत्य जीवन में सुख एवं प्रेम

माता पार्वती एवं भगवान शिव की पूजा करने से पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम, विश्वास एवं आपसी समझ बढ़ने की मान्यता है।


• योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति

अविवाहित कन्याएँ श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखकर भगवान शिव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं और उत्तम जीवनसाथी की कामना करती हैं।


• पति की दीर्घायु एवं परिवार की समृद्धि

यह व्रत पति के स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

कजरी तीज व्रत एवं पूजा विधि

  • निर्जला अथवा फलाहार व्रत: परंपरा के अनुसार महिलाएँ सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से फलाहार भी किया जा सकता है।
  • पूजा स्थल की तैयारी: घर के ईशान कोण या स्वच्छ स्थान पर चौकी रखकर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाएँ तथा भगवान शिव, माता पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • श्रृंगार अर्पित करें: माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी, चुनरी एवं अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करें।
  • व्रत कथा एवं चंद्र दर्शन: संध्या समय कजरी तीज व्रत कथा सुनें, चंद्रमा को अर्घ्य दें और उसके बाद व्रत का पारण करें।

कजरी तीज पूजा की आवश्यक व्यवस्था

पूजा का विषय अनुशंसित व्यवस्था
पूजा की दिशा ईशान कोण में चौकी स्थापित करें तथा पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें।
पूजा सामग्री सिंदूर, चूड़ियाँ, चुनरी, फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य एवं सुहाग सामग्री रखें।
व्रत का भोजन पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करें। प्याज, लहसुन एवं मांसाहार से परहेज़ करें।

योग्य पंडित द्वारा पूजा कराने का महत्व

कजरी तीज की पूजा शास्त्रसम्मत विधि, सही मंत्रोच्चारण एवं उचित मुहूर्त में की जाए तो इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अनुभवी वैदिक पंडित के मार्गदर्शन में पूजा करने से सभी विधियाँ सही प्रकार से संपन्न होती हैं।


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